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विशेष प्रस्तुति
आज का कवि
हरयाणे की धरती के उन महान कवियों और सांगकारों की स्मृति जिन्होंने हमारी संस्कृति को सींचा।
अली बख्श
(1918 - 1982)
लोक रागनी अंश: सत्यवादी हरिश्चंद्र सांग
"धर्म पे अडिग रहण की बातें, लखमीचंद सुणावेगा। सत की खातर राज गंवाया, वो जग में यश पावेगा।"
अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।
मूर्धन्य साहित्यकार
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इस हफ्ते की रागनी
धरती माँ की रागनी
प्रस्तुति: पंडित लखमीचंद
धरती माँ जैसी कोई ना माँ, सब कुछ दे दिया इस माँ ने। हरयाणे की सोने की धरती, हर बेटे को पाल दिया इस माँ ने। गेहूं धान बाजरा उगाया, खेत-खलिहान हरे कर दिए। म्हारी माटी की महक न्यारी, जन्म से मरण तक प्यार दिए।
आज का चुटकुला
हरयाणवी हास्य व्यंग्य
श्रेणी: गामा आले
ताऊ जी से किसी ने पूछा - ताऊ, थारे घर में कितने लोग हैं?
ताऊ बोले - बेटा, जो खाणा खाने बैठते हैं वो 10 हैं, और जो पाँव फैलाकर सोते हैं वो 15। अब तू गिन ले।
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